फरीदाबाद के बीके अस्पताल में कल National Quality Assurance Standards (NQAS) की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची। हालांकि टीम के पहुंचने से पहले ही अस्पताल में अचानक हुए सुधारों ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संभवतः निरीक्षण टीम के आने की सूचना अस्पताल प्रशासन को पहले ही मिल गई थी। जिसके चलते अस्पताल को पहले से ही व्यवस्थित कर दिया गया। फ़टी चादरें बदल दी गयी, लिफ्ट को ठीक कर दिया गया, खराब पड़े वाटर कूलर को ठीक कर दिया गया। इसके अलावा पूरे अस्पताल में साफ-सफाई करवाई गई और कई व्यवस्थाएं दुरुस्त नजर आईं।
अस्पताल के अंदर निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाएं बेहतर दिखाई दीं, हो सकता है यह सुधार अस्थायी हो. निरीक्षण के बाद जब केंद्रीय टीम बाहर निकली, तो मीडिया ने उनसे जांच को लेकर सवाल पूछे। टीम से यह जानने की कोशिश की गई कि क्या निरीक्षण हुआ और क्या कमियां पाई गईं। हालांकि टीम के सदस्य इन सवालों का स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए और आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।
जानकारी के अनुसार, National Quality Assurance Standards (NQAS) की टीम अस्पतालों में स्वच्छता, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, बेडशीट सिस्टम, ऑपरेशन थियेटर की स्थिति और रिकॉर्ड मेंटेनेंस जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करती है। हालाँकि बीके अस्पताल में निरीक्षण के दौरान क्या पाया गया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की नजर टीम की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि अस्पताल की वास्तविक स्थिति क्या है और क्या यहां स्थायी सुधार किए जाएंगे या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पहले से मिली सूचना के आधार पर अस्पताल की व्यवस्था दुरुस्त कर दी गयी थी ? अगर ऐसा है, तो यह निरीक्षण की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। लोगों में यह भी चर्चा है कि कहीं इस पूरे मामले में किसी प्रकार की सांठ-गांठ तो नहीं हुई। अगर निरीक्षण से पहले ही कमियों को छिपा दिया जाता है, तो असल समस्याएं सामने ही नहीं आ पाएंगी। अगर निरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही, तो सुधार की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है। कागजों में सब कुछ बेहतर दिखेगा, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी रहेगी।


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