फरीदाबाद: शहर के प्राइवेट स्कूल दोनों हाथों से अभिभावकों को लूटते हैं लेकिन इनके खिलाफ ना तो सरकार एक्शन ले पाती है और ना ही अभिभावक कुछ कर पाते हैं, मजबूरी वश अपने बच्चों के लिए शिक्षा खरीदने के लिए प्राइवेट स्कूलों के हाथों माँ-बाप लुटते रहते हैं लेकिन. इसके खिलाफ शहर के जाने माने वकील एल एन पाराशर ने आवाज उठायी है. उन्होंने प्राइवेट स्कूलों की लूट के लिए सीधा सीधा हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को जिम्मेदार ठहराया है.
एल एन पाराशर ने मुख्यमंत्री को चेतावनी दी है कि या तो प्राइवेट स्कूलों की लूट को रोक लें वरना जनता उन्हें घर बैठा देगी. जिस तरह से हाल के तीन राज्यों के चुनावी नतीजे आये हैं उसी तरह से हरियाणा की जनता वर्तमान सरकार के खिलाफ भी अपना गुस्सा निकालेगी.
वकील पाराशर ने कहा - मुझे सूचना मिली है कि शहर के कई निजी स्कूल संचालक अपने स्कूल के छात्रों को मंहगे दाम पर सर्दियों की ड्रेस बेंच रहे हैं और एक बड़ी लूट कर रहे है जिनके खिलाफ मैं सबूत एकत्रित कर रहा हूँ और सबूत मिलते ही इन पर केस दर्ज करवाऊंगा।
पराशर ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी स्कूल बच्चों के अभिभावकों से हर साल वार्षिक फंड नहीं ले सकता। इसके अलावा मनमर्जी से फीस में बढ़ोत्तरी नहीं कर सकता। मनमर्जी से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें स्कूलों में नहीं लगा सकता। इसके साथ ही निजी स्कूल अपनी कुल सीटों की 10 प्रतिशत सीटों पर गरीब परिवारों के बच्चों को निशुल्क पढ़ाएं। निजी स्कूल संचालक इनमें से किसी भी नियम पर खरे नहीं उतर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार का कर्तव्य बनता है कि वह एनसीईआरटी की किताबों के अलावा अन्य किताबों की बिक्री पर रोक लगाए।
पाराशर ने कहा कि मैं आज ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को पत्र लिखने जा रहा हूँ कि वो जनता को इस लूट खसोट से बचाएं। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल संचालक सभी नियमों को ताक पर रखकर हर साल फीस में मनमर्जी से इजाफा कर रहे हैं। हर साल वार्षिक फंड के नाम पर अभिभावकों की सरेआम जेब काट रहे हैं। निजी स्कूल संचालक स्कूल ड्रेस निजी संचालकों की पुस्तकें लगाकर भी अभिभावकों को लूट रहे हैं। सरकार इस लूट ऊपर खामोश है जो अच्छी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हरियाणा सरकार ने इस लूट पर तुरंत रोक लगाए वरना अगले चुनावों में जनता सरकार को सबक सिखा सकती है।


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